चार पलोंकी है ये जिंदगानी...

चार पलोंकी है ये जिंदगानी,
इसे उसुलोमे मत समेटना....
खुद के हिस्से का तो जी लेते है सभी,
कभी दुसरो का हिस्साभी बनकर देखना...

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